Adani Group: अडानी समूह के खिलाफ कई गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं

कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में अडानी समूह पर आरोपों का सिलसिला जारी रखते हुए एक बार फिर से सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस का दावा है कि अडानी समूह के खिलाफ कई गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, और ये आरोप वित्तीय अनियमितताओं और अवैध व्यापार गतिविधियों से संबंधित हैं। पार्टी ने इस मामले में एक नई दिशा में हमला करते हुए दावा किया है कि यह मुद्दा केवल अडानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं बड़ी साजिश जुड़ी हुई है। कांग्रेस ने इस संदर्भ में अमेरिकी निवेशक जॉर्ज सोरोस का नाम भी उठाया है, जिनके बारे में कांग्रेस का कहना है कि उनका अडानी समूह के खिलाफ कार्रवाई के पीछे कोई न कोई हाथ हो सकता है। कांग्रेस ने सोरोस के खिलाफ आरोप लगाया कि उनका निवेश और वित्तीय दबाव अडानी समूह की वित्तीय स्थितियों को और कमजोर करने के लिए था। हालांकि, सोरोस और उनकी कंपनियों के खिलाफ कांग्रेस ने सीधे तौर पर कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है, लेकिन उनका यह कहना है कि अडानी समूह को कमजोर करने के पीछे कुछ विदेशी निवेशकों का हाथ हो सकता है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में चुप है, और यह संदेह पैदा करता है कि सरकार का इस पूरे प्रकरण में कोई न कोई संबंध हो सकता है। कांग्रेस पार्टी के इस आरोप को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जवाब देते हुए इसे बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया है। बीजेपी का कहना है कि अडानी समूह पर लगे आरोपों की जांच संस्थागत रूप से की जा रही है, और यह आरोप केवल विपक्षी दलों के राजनीतिक फायदे के लिए उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे पर लगातार हो रहे हंगामे को “हल्ला बोल” करार दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी आगामी चुनावों में अडानी मामले को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की योजना बना रही है। कांग्रेस का उद्देश्य है कि जनता को यह समझाया जाए कि अडानी मामले के पीछे केवल एक व्यापारी नहीं, बल्कि इसमें सरकार और विदेशी ताकतों का भी हाथ हो सकता है। यहां यह सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस का यह आरोप सोरोस पर सही है, या यह केवल एक राजनीतिक रणनीति है? यह मामला अब विपक्षी राजनीति में गर्मा गया है और आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है।










